
शूल बने फूल हैं , चुभन में भी मिठास है ,
है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !
जिस शीश सजना किरीट था उस शीश पर जटा बंधी
चौदह बरस वनवास पर चले प्रिय महारथी ,
मैं भी चली उस पथ पे ही जिस पथ पे प्राणनाथ हैं !
है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !
ये है मेरा सौभाग्य श्री राम की दासी हूँ मैं ,
प्रिय हैं मेरे अमृत सदृश कंठ तक प्यासी हूँ मैं ,
जन्मों-जन्मों के लिए थामा प्रभु का हाथ है !
है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !
वन वन प्रभु के संग चल चौदह बरस कट जायेंगें ,
भैया लखन को साथ ले वापस अयोध्या आयेंगें ,
होगी सनाथ फिर प्रजा जो हो रही अनाथ है !
है मुदित ह्रदय मेरा , मिला प्रभु का साथ है !
शिखा कौशिक 'नूतन '
2 टिप्पणियां:
Wah ! Good,
sundar aadhyatmik prastuti .badhai
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